पौष पूर्णिमा के मौके पर संगम तट पर एकत्रित हुई श्रद्धालुओं की भीड़

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पौष पूर्णिमा पर संगम स्नान करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति

आज पौष पूर्णिमा है। पौष पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान करने के लिए रविवार की शाम देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ा। इस मौके पर श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा के अपने पापों को धोते हैं। पौष पूर्णिमा पर देश के कोने कोने से श्रद्धालु संगम पर पुण्य की डुबकी लगाने आते हैं। पौष पूर्णिमा के दिन सोमवार को प्रयागराज कुम्भ में दूसरा बड़ा स्नान पर्व है। मकर संक्राति पर पहला शाही स्नान था जहाँ दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने स्नान किया था।इस स्नान पर्व का प्रभाव दो दिन रहेगा।

स्नान, दान और जप-तप की पौष पूर्णिमा का व्रत-पूजन रविवार से शुरू हो चुका है, जबकि स्नान-दान सोमवार को करना पुण्यकारी है। कड़ाके की ठंड के बीच श्रद्धालु सुबह से ही गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। पौष पूर्णिमा पर स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति की मान्यता है। पौष पूर्णिमा के दिन संगम में 35 देशों नागरिकों ने भी स्नान किया। विदेशियों ने भी जय श्री राम, जय गंगा मैया और जय भोले शंकर के जयकारे के साथ संगम में डुबकी लगाई।

 

सूर्य देव का महीना होता है पौष का महीना

पौष पूर्णिमा के दिन की तिथि को सूर्य और चंद्रमा का संगम भी कहा जाता है। पौष का महीना सूर्य देव का महीना होता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। चंद्रमा के साथ-साथ पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। इस साल पौष पूर्णिमा को लेकर लोगों में बहुत उत्साह है। ऐसा माना जा रहा है कि पूर्णिमा 20 जनवरी से शुरू हो जाएगी, जो 21 जनवरी तक चलेगी।

इसी दिन से संगम में स्नान करने के साथ त्याग-तपस्या का प्रतीक कल्पवास भी शुरू हो गया है। सभी श्रद्धालु देशभर के गृहस्थ संगम तट पर श्रद्धालुओं के लिए बनाये गए टेंट में रहकर एक महीने तक भजन-कीर्तन करेंगे। मोक्ष की आस में संतों के सानिध्य में वे अपना समय व्यतीत करेंगे। वे आज से कल्पवासी सुख-सुविधाओं का त्याग करके दिन में एक बार भोजन व तीन बार गंगा स्नान करके तपस्वी का जीवन व्यतीत करेंगे।

 

प्रशासन ने किये सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

पौष पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं को बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किये। कुंभ मेला क्षेत्र से चार किमी पहले वाहनों को रोके जाने के कारण पौष पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालु मीलों पैदल चल कर संगम तट पर पहुंचे। रविवार की सुबह से ही बसों, ट्रेनों, निजी वाहनों से कल्पवासियों का रेला चलने लगा। लाखों की तादाद में श्रद्धालु सिर पर गठरी, कंधे पर झोला लिए संगम जाने वाले मार्गों की ओर बढऩे लगे। कल्पवासियों के शिविरों में चहल-पहल बढ़ गई। कुंभ मेला क्षेत्र तक जाने में कल्पवासियों, श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए चार पहिया, दो वाहनों का प्रवेश रविवार की रात को ही रोक दिया गया था। प्रयागराज स्टेशन के सिविल लाइंस साइड से वाहनों को रोका गया है। सामान और बच्चों को लेकर लोग पैदल ही संगम की ओर बड़े जा रहे हैं। इस तरफ से सिर्फ यात्रियों को संगम की ओर जाने की सुविधा है। प्रवेश सिटी साइड से है।

प्रशाशन ने श्रद्धालुओं और शहर के लोगों की सुविधा को भी ध्यान में रखते हुए कुछ मार्गों को छोड़कर बाकी रास्तों पर कार, मोटरसाइकिल और टैम्पो का आवागमन शुरू रखा है। प्रशासन के नियमों के अनुसार यूपी 70 नम्बर वाले वाहनों और मेला क्षेत्र में कल्पवासियों के वाहनों को नहीं रोका जाएगा।

 

महाकुम्भ में होंगे कुल 6 स्नान (3 शाही स्नान)

 

15 जनवरी 2019 – मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)

21 जनवरी 2019 – पौष पूर्णिमा

 4 फरवरी 2019 – मौनी अमावस्या (दूसरा शाही स्नान)

10 फरवरी 2019 – बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)

19 फरवरी 2019 – माघ पूर्णिमा

4 मार्च 2019 – महाशिवरात्रि

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